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शहर में बंशी वाजे गैरी

टेरः- शहरीये में बाजे बीण मंदरी , अखण्ड धुन बंशी आ बाजे गेरी, ज्ञान ध्यान का धोरा लागा लागी सुरत तणी।  अलक पुरूष का हैं बिखमा मार्ग सैरी सांकड़ली ॥ शहरिये में बंशी बाजे गेरी । नाभी कमल में मडी बजारो हिरलो री हाट भरी।  ज्ञानी होवे सोई पारख लेणा पारखो हीर कणी ॥ शहरिये में बंशी बाजे गेरी । गिगन मण्डल अखी अखाड़ा झिल मिल ज्योती जली।  गेबी सरूपी वटे बाजा बाजे अणहद राग सुणी ॥ शहरिये में बंशी बाजे गेरी । अनेक  सन्तो रे शरणे आया धीरप ध्यान धरी।  स्वामी डूंगरपुरी चरणो री सेवा संतो रो सथर थणी॥ शहरिये में बंशी बाजे गेरी ।

रण संग्राम भाया बिन सुनो

दोहा : ससि बिना सुनी रैण ज्ञान बिन हिरदा सुना, बिन पुत परिवार पात  बिना  तरवर  सुना। महंत बिना मठ सुना  नृप बिन नगरी सुनी, दन्त बिन गज सुना हंस बिन तरवर सुना। घटा सुणी हैं बे-दामणी, वैताल कहे सुणो, नृप  विक्रम घर  सुना हैं,  बिन  कामणी। रण संग्राम (भाया) सुरा बिन सुनो,  आ धरती सुनी भीमा पांडू रे बिना।   भाव बिना भक्ति रस सुनो,  बिना भगत भगवान सुना।  रण संग्राम सुरा बिन सुनो.. धरती रो तेज सुरज बिना सुनो,  रैण सुनी चांद (शशि) रे बिना। रण संग्राम सुरा बिन सुनो.. सरवर पाल पाणी बिन सुनी,  तरवर सुनो एक पान रे बिना। रण संग्राम सुरा बिन सुनो.. अबला री गोद पुत्र बिना सुनी, बहन दुःखी एक भाई रे बिना।  रण संग्राम सुरा बिन सुनो.. सासु बिना रे सासरियो सुनों, थाल सुनो एक साला रे बिना।  रण संग्राम सुरा बिन सुनो.. दोय कर जोड़ युधिष्ठिर बोले, हिरदो सुनो हरि नाम के बिना। रण संग्राम सुरा बिन सुनो..

भजन यू करणा निर्भय होय नचीत

सगरामा इण संसार में माला मोटी बात,  धन्य जका नर फेरे, फेरे दिन और रात।  फेरे दिन और रात कमाई करे वे भारी,  या स्वर्ग में जावसी या फिर जन्म तैयारी। ऊंचे ठिकाणे जन्म सी घणा जोड़ेला हाथ, सगरामा संसार में माला मोटी वात ॥  भजन यूं करणा रे भायो निरभय होय नचीत ॥टेर॥ आसन पद्म में ध्यान लगावो तन मन इन्द्रियां जीत।  सिकल्प विकल्प मेट फुरणा  तुर्या सोही अतीत॥ भजन यूं करणा रे भाईड़ो निर्भय होय नचीत ॥टेर॥ रवि-शशी का देख सरौदा, सुखमण कर प्रतीत। अरद उरद बीच तार लगाने सूरत करो संगीत॥  भजन यूं करणा भाईड़ो निर्भय य होय नचीत ॥टेर॥ अगम भोम का ऐड़ा मोर्चा बांध लिया तन बीच। भजन तोब शिखर गढ़ छुटी भागी भ्रम री भीत॥  भजन यूं करणा रे भाईड़ो निर्भय होय नचीत ॥टेर॥ सोलन शिखर में पागी चढ़िया वहां नहीं होवे शीत।  शशि भाण सतगुरु की शोभा बिन नेणा प्र-तीत॥  भजन यूं करणा रे भायो निर्भय होय नचीत ॥टेर॥ बिन कर नटवो ढोल बजावे, बिन साज  संगीत।  बिना पावं के नटणी नाचे, बिन मुख गावे गीत॥  भजन यूं करणा भायो निर्भय होय नचीत ॥टेर॥ अदभुत खेल खिलाड़ी खेले, यह बेगम ...

भक्ति सुरा री

 भक्ति सुरा री, सुरा लड़े रण खेत में,  कायर भागा जाय! भक्ति सुरा री। कोनी कायर वालो काम भक्ति सुरा री॥ भक्ति कमाई ए सती श्रिया दे, चेलों भगत प्रहलाद भक्ति सुरा री, बलता मु बछिया तार! भक्ति सुरा री। कोनी कायर वालो काम भक्ति सुरा री॥ भक्ति कमाई ए सती अनुसूया, ऋषि अतरंग लार! भक्ति सुरा री, आंगण कुटी बणाय भक्ति सुरा री। कोनी कायर वालो काम भक्ति सुरा री॥ भक्ति कमाई ए पोचे पांडवे, ज्योरे घर दुर्वासा आय! भक्ति सुरा री, बलियो ओम उगाय भक्ति सुरा री, कोनी कायर वालो काम भक्ति सुरा री॥ भक्ति कमाई ए रानी द्रौपदा, पांचों पांडव घर नार! भक्ति सुरा री, सतड़ा री पाल बंधाय भक्ति सुरा री, कोनी कायर वालो काम भक्ति सुरा री॥ भक्ति कमाई ए मीरा मेड़तनी, ज्योरे लारे भोजोराज! भक्ति सुरा री, गुण गोविंद रा गाय भक्ति सुरा री, कोनी कायर वालो काम भक्ति सुरा री॥ भक्ति कमाई ए रानी रूपादे, ज्योरे सागे रावलमाल! भक्ति सुरा री, सैजे सुरगा जाय! भक्ति सुरा री, कोनी कायर वालो काम भक्ति सुरा री॥ भक्ति कमाई ए रानी तौलादे, ज्योरे सागे जैसल राज! भक्ति सुरा री, गुरु उगम जी लार! भक्ति सुरा री, कोनी कायर वालो काम भक्ति सुरा...

मनवा भूलो जावे रे

 मनवा भूलो जावे रे मना क्यों भूलो जावे रे।  सतगुरु जी समझावे रस्ते क्यो नी आवे रे॥ मेहर हुई महादेव री थने मनख बणायो रे,  राम नाम रा कोल करने जग में आयो रे। मनवा भूलो जावे रे मना क्यों भूलो जावे रे, सतगुरु जी समझावे रस्ते क्यो नी आवे रे पर निंदा में बक बक बोले जीभ थकावे रे, नाम राम में ओटा लेवे थने आलस आवे रे। मनवा भूलो जावे रे मना क्यों भूलो जावे रे, सतगुरु जी समझावे रस्ते क्यो नी आवे रे। खेल तमाचा देखण जावे रैण गमावे रे, सतरी संगत में आवे थाने निंद्रा आवे रे। मनवा भूलो जावे रे मना क्यों भूलो जावे रे,  सतगुरु जी समझावे रस्ते क्यो नी आवे रे। मध पिवे और नशो कर तू धूम मचावे रे, मात पिता सु करे लड़ाई शर्म नी आवे रे। मनवा भूलो जावे रे मना क्यों भूलो जावे रे  सतगुरु जी समझावे रस्ते क्यो नी आवे रे जियाराम रो केणो काई तू बुरो मनावे रे, ऋषि मुनि केता आया वे नरगा में जावे रे। मनवा भूलो जावे रे मना क्यों भूलो जावे रे, सतगुरु जी समझावे रस्ते क्यो नी आवे रे।

मनवा भूलो जावे रे मनवा

मनवा भूलो जावे रे मना क्यों भूलो जावे रे।  सतगुरु जी समझावे रस्ते क्यो नी आवे रे॥ मेहर हुई महादेव री थने मनख बणायो रे,  राम नाम रा कोल करने जग में आयो रे। मनवा भूलो जावे रे मना क्यों भूलो जावे रे, सतगुरु जी समझावे रस्ते क्यो नी आवे रे पर निंदा में बक बक बोले जीभ थकावे रे, नाम राम में ओटा लेवे थने आलस आवे रे। मनवा भूलो जावे रे मना क्यों भूलो जावे रे, सतगुरु जी समझावे रस्ते क्यो नी आवे रे। खेल तमाचा देखण जावे रैण गमावे रे, सतरी संगत में आवे थाने निंद्रा आवे रे। मनवा भूलो जावे रे मना क्यों भूलो जावे रे,  सतगुरु जी समझावे रस्ते क्यो नी आवे रे। मध पिवे और नशो कर तू धूम मचावे रे, मात पिता सु करे लड़ाई शर्म नी आवे रे। मनवा भूलो जावे रे मना क्यों भूलो जावे रे  सतगुरु जी समझावे रस्ते क्यो नी आवे रे जियाराम रो केणो काई तू बुरो मनावे रे,  ऋषि मुनि केता आया वे नरगा में जावे रे। मनवा भूलो जावे रे मना क्यों भूलो जावे रे, सतगुरु जी समझावे रस्ते क्यो नी आवे रे।

भले गोगाजी वाजिया वैरागी ढोल

भले सुहाणो आवी हैं आठम री हैं रात छप्पन पियालो ती धर्मी हो होसरी रे, भले गोगाजी वाजिया वेडाला ढोल  हे वाजा बाजे मधरे वाजिया रे, हासन मोरे भोपाजी रो मोड़  मोती भोपेजी चावल मेलिया ही आवो ना मारा तेलवाड़ा रा राज केसर भवानी ने हाथे लावीजो रे, परो नी फूटो नदियो वालो नीर  वीरलो नृसिलो हाथे लावजे ही  केहर, सदी मां ने भेली भेली आव चौरासी खातो ने हाथे लाव ही जे  आज सहेलियो सोंबले वाली रात  धर्मी वधावो मुंगे मोतीया ही रे  हां सहेलियो हेरि होकड़ली हो राज हेरिये वसावो गलरा फूलड़ा रे, भले ढोलिड़ा ढोल गेरो रे बजाव चायर गोगा रमवा आविया रे, भले गोगाजी कृष्ण देवासी जस गाय थोरा टाबरियो ने होरा राखजो ही जे 

सुरा सावंत रंग दो केसर घोड़ी री झूल

 सुरा सावंत केसर कटोरे लेवो गाल  भाई रे! केसर कटोरे लेवो गाल चढ़ती जोनो रा करदो छोटणा रे। चांदा सावंत रंग दो केसर घोड़ी री झूल  भाई रे! रंग दो केसर घोड़ी री झूल जोनियो रा रंग दे मेमद मोलिया रे। हारे पाबू बणिया पुनम रा गेरा चांद पाबू! बणिया पूनम रा गेरा चांद  जोनी बणगा किरणो रा झूमका रे। चढ़ने जोना होगी दरवाजे सू निकास  भाई रे! होगी दरवाजे सू निकास  आडी फर बोली देवल चारणी रे।   देवल दुर्गा थारा कइजे भूंडोडा सभाव  बाई ए! थारा कइजे भूंडोडा सभाव  कुंवारी जोनो रे आडा कियो फिरो रे।   बिंद बणियोड़ा थे तो जावो थोरी जोन  भाई ए! थे तो सिवाधो थोरी जोन  धन रे रूखालो किण ने छोड़ियो रे। देवलदुर्गा सैस किरणा रो ऊगे भाण बाई ए! सैस किरणा रो सुरज भाण सबसु वडेरा बुढेजी ने छोडिया रे। भाई भालाला बुढ़ेजी ने लेजा थारी जोन  भाई ए! बुढ़ेजी ने लेजा थारी जोन  चांदेजी ने छोड़ो अपणे कोट में रे। देवल दुर्गा चांदे ने छोड़या सरे नाय बाई ए! चांदेजी ने छोड़या सरे नाय चांदेजी अरोगे सावण भादवो रे। मान पाबू चांदेजी ने लेजा थारी जोन  भाई ए! चांद...

धिन धिन दासी गुरु हमारी

सुलताना मुल्क बुखारंदा धिन है बांधी गुरु हमारी,  रस्ता बताया पिव प्यारन दा जिनको नेह लगा ईश्वर से  रामो ही राम पुकारंदा सूती सेरी खड़ी विगुती,  तीन ताजणा ताड़ंदा बादशाह से किया जवाबा,  ये ही हाल तुम्हारंदा चुन चुन कलियां सैज बिछाती कली कली रस न्यारंदा अब तो धरती सोवण लागा कंकड़ नहीं बुहारंदा सवा टांक तन चोला पहरे  तीन टांक तन सारंदा अब तो बोझ उठावण लागा गुदड़ सेर अठारंदा चंगी चीज निवाले लेता ताता तुरंत तैयारंदा  अब तो बासी खावण लागा  शीला सांझ सवेरे दा दल बादल ले लश्कर चढता फौजा चढ़ती नगारंदा अब तो पैल चारण लागा तजिया राज पैजारंदा इतना तज कर लीनी फकीरी  धिन आकीन विचारंदा  कहे कबीर सुणो भाई साधों फकड़ ज्ञान अखारंदा ।

कैलाशों रे माय रे वनवासा रो नाम

मने भालवा मेल रे मने होजवा मेल अमिया ने शंकर रमे होगटे..हां..जे कैलाशों रे मायने वनवासो रे माय शिव ने पार्वती रमे होगटे.. हां..जे रमिया पेले दाव रे रमिया पेले दांव  गंवरा जीता ने शंकर हारिया..हां..जे मने भालवा मेल रे मने होजवा मेल अमिया ने शंकर रमे होगटे..हां..जे रमिया बीजे दाव रे रमिया पेले दांव  गंवरा जीता ने शंकर हारिया..हां..जे मने भालवा मेल रे मने होजवा मेल अमिया ने शंकर रमे होगटे..हां..जे रमिया तीजे दाव रे रमिया पेले दांव  गंवरा जीता ने शंकर हारिया..हां..जे मने भालवा मेल रे मने होजवा मेल अमिया ने शंकर रमे होगटे..हां..जे रमिया चौथे दाव रे रमिया पेले दांव  गंवरा जीता ने शंकर हारिया..हां..जे मने भालवा मेल रे मने होजवा मेल अमिया ने शंकर रमे होगटे..हां..जे गाले नादिये भार रे गाले नादिये भार हवले हवले महादेव हालिया.. हां..जे मने भालवा मेल रे मने होजवा मेल शिव ने पार्वती रमिया होगटे..हां..जे होकड़ी हेरी रे माय रे वकम भोम रे माय  होमे बायो रो रथड़ो आवियो.. हां..जे मने भालवा मेल रे मने होजवा मेल गंवरा ने शंकर रमिया होगटे..हां..जे कावण थारो नोम रे कावण थारो ...

अब तो दीदार दिखा दे मैं तेरा हो चुका हूं

 अब तो दीदार दिखा दे,  मैं तेरा हो चुका हूं। तेरे इश्क में प्यारे, बदनाम हो चुका हूं। नाम लिया जब तेरा, दुनिया सु मुखड़ा फेरा‌। मैंने हरदम तुझको हेरा, हैरान हो चुका हूं। अब तो दीदार दिखा दे, मैं तेरा हो चुका हूं। मैंने पहना फकीरी बाना, मुझे दूनिया देती ताना। ताने से क्या शर्माना, दिवाना हो चुका हूं। अब तो दीदार दिखा दे, मैं तेरा हो चुका हूं। मोहे तेरी याद सतावे,  दिन रात निंद नहीं आवे। अन जल कछू नी भावे,  बीमार हो चुका हूं। अब तो दीदार दिखा दे, मैं तेरा हो चुका हूं। आया हूं तेरे दर पे, जाऊंगा दीदार करके। अचलुराम हटेगा मरके  परेशान हो चुका हूं। अब तो दीदार दिखा दे, मैं तेरा हो चुका हूं।

रामजी रे नाम रा खरा खजोना

 राम जी रे नाम रा खरा खजोना  राम जी रे नाम रा हाचा हरोदा  आयो अवसरियो भाई भूलो मती रे, गुरू रा वचन सदा ही फल मीठा  खारी खारी वस्तु लाइजो मती रे  सतड़े री कुछी धर्म वालो तालो नुगरो रे हाथ भायो दीजो मती रे गेरा गेरा फूल रोहिड़ो रे केजे  वे फूलड़ा घर लाजो मती रे गेरी गेरी नदियो बेवे रे सवाई  पर नदियों में भायो नाजो मती फल नी फले दिखे रे फूटरो गुण नहीं जिण पांव रति रे असुर मारेश धणी भक्त उबारे आद देवा ने थे भूलजो मती रे रामजी री आशा में हैं विशवासा पोणी माथे पत्थर तीरे रे  दोय कर जोड़ अखोजी खीवण बोले खाली खाली ढोलका कुटो मती रे

गुरु मिलिया ब्रह्मज्ञानी

गणपत सुरसत शारद सिंवरू  दीजो अनुभव वाणी।  परसत परसत पीर परसिया परसी पीरों री निशाणी संतों ! गुरु मिलिया ब्रह्मज्ञानी ॥ ज्ञान सुणावे कियो हरि नेड़ो बात आगम री जाणी   संतों ! गुरु मिलिया ब्रह्मज्ञानी ॥ दिल में दरशिया प्रेम से परसिया सतगुरा री सेलाणी अगम निगम रा भेद बताया आद जुगत ओलखाणी संतों ! गुरु मिलिया ब्रह्मज्ञानी॥ अल्लाह खुदा अलख निरंजन निराकार निर्वाणी हरदम हेर घेर घर लावो मिळी आ तो सतरी निशाणी संतों ! गुरु मिलिया ब्रह्मज्ञानी॥ गुरु अवधूता पूरा मिळिया गुरु मिळिया गम जाणी।  कहे हेमनाथ सुणो भाई सन्तों सुरता सहज समाणी संतों ! गुरु मिलिया ब्रह्मज्ञानी॥

भजन यूं करना रे निर्भय होय

भजन यूं करना रे निर्भय होय नचीत ॥टेर ॥ आसन पद्म निज ध्यान लगावो,  तन मन इन्द्रियों जीत।  सिकल्प विकल्प मेट महा  फुरणा तुर्या सोही अतित॥  रवि-शशी का देख स्वरोदा  सुखमण कर प्रतीत ।  अड़द उड़द बीच तार लगावे,  सूरत करे संगीत ॥ अगम भोम का अदल मोरछा,  बांध लिया तन बीच  भजन तोब शिखर गढ़ छुटी  टूटी मेरू भीत ॥ पागी चढ़िया शिखर गढ़ माही  वहां नहीं उष्ण शीत।  असंख भाण सत गुरु की  शोभा बिन नेणा प्रतीत॥ कर बिन ढोल बजावे नटवो साज बिन संगीत  बिना पाव वहां नटणी नाचे बिन मुख गावे गीत ॥ अदभुत खेल खिलाड़ी खेले,  यह बेगम की रीत  बाबुलाल सतगुरु की कृपा,  बाजी लीनी जीत ॥

सोरठ भजन वाणी

दोहा : रागा पति सोरठा और बाजा पति बीन, देशा पति मालवों शहरा पति उज्जैन। सोरठ जब ही छेड़िये जब सोपो पड़ जाय, ज्ञानी सो उठ ने सुणे मुर्ख नींद गुरा  क्या मैं जाणु किस विध,  राखे मारो राम ! हरिया डाल पर पंछी बैठा, धर रया रघु जी रो ध्योन, मैं क्या जाणु किस, विध राखे मारो राम । नीचों भालु तो पापी,  पारसी बैठो! उपर, भले हैं शिकोल रे,   क्या रे जाणु किस,  विध राखे मारो राम। पापी पारसी ने सर्प,  बस्तियों! शिकरा रे लागो हैं बाण हे  क्या मैं जाणु किण,  विध राखे राम। केवे बाई मीरा, सांवरा गिरधर रा गुण,  पछिड़ा रे भयो आरोम। क्या मैं जाणु किस  विध राखे मारो राम ।

गोविन्द रा गुण गाय बन्दा उमर जावे

 दोहा : सोने री लंका बनी और सोने रा घर बार, रति सोनो ना मलियो रावण मरती वार। हंस हंस ने बोलता दिन में सो सो वार, वे मानुष कठे गया सुरता करो विचार। ★★★ गोविंद रा गुण गाय बन्दा रे, मालिक रा गुण गांव बन्दा रे, उमरिया जावे जावे से भाई जावे। __________________________________ जावे से जावे उमरिया,  पासी कोनी आवे! थोड़ा मालिक रा गुण गांव बन्दा रे, गोविंद रा गुण गांव बन्दा रे, उमरिया जावे जावे से भाई जावे। __________________________________ गर्भवास में कोल किया था, बाहर आए हरि नाम ना लिया,  था! भूल गयो भगवान बन्दा रे, उमरिया जावे जावे से भाई जावे। __________________________________ बालपणो हद खेल गंवायो,  यौवन में माया विलमायो, करियो नी सुकरत काम बन्दा रे, उमरिया जावे जावे से भाई जावे। __________________________________ आगे बुढ़ापो आवेला भारी, ताना देवेला दुनिया सारी, भूंडी करी भगवान बन्दा रे, उमरिया जावे जावे से भाई जावे। __________________________________ रामानंद गुरू दे रया हेला, सुण ले दास कबीर तू चेला, भजो हरि वाला नाम बन्दा रे, उमरिया जावे जावे से भाई जावे। ____...

साधु भाई सतगुरु साक भरेलो

 दोहा: हंसा सरवर ना छोड़िये जो जल खारा होय, सीलर सीलर भटकता  भला नी केवे कोय। हंसा ज्यों सरवर जपे वन में जपे मोर,  थो मन में ऐसे जपो जैसे छंद चिकोर। ★★ हड़दम ताल लगी गढ़ भीतर,  नाभि से निगे करेलों,  उल्टा बाण गिगन जाय लागा,  झिल मिल जोग जगेलो! साधु- भाई सतगुरु साक भरेलो। _______________________________ सिमरिया वे सन्त पार पोचिया,  विन सिमरिया डूबेलो! साधु-  भाई सतगुरु साक भरेलो। _______________________________ उपजिया अंणद गिगन जाय गर- जिया अणहद नाद घुरेलो, पीवत प्रेम विछड़ जाई काया,  जीव पीव मिल रेलो! साधु-  भाई सतगुरु पार करेलो । _______________________________ सिमरिया वे सन्त पार पोचिया,  विन सिमरिया डूबेलो! साधु-  भाई सतगुरु साक भरेलो। _______________________________ त्रिवेणी जाय हंस विराजे,  हीरो रो सर्वण चुगे लो, मिट गई तास प्रेम सुख उपजे, जुग जुग राज करेलो! साधु-  भाई सतगुरु पार करेलो। _______________________________ सिमरिया वे सन्त पार पोचिया,  विन सिमरिया डूबेलो! साधु-  भाई सतगुरु साक भरेलो। ...

हाल मारी सजनी देव मनावो

दोहा : पेला किण ने  मनाविये   किण रा लिजे नाम, मात पिता गुरु ओपणा अलख पुरूष रा नाम। ★★★ शंख मजिरा वीणा रे वाजिया, जती सती ढोल गुरावेला,  अंग रो मेल उतार देवी उमिया,  वण रो गणेश बणावेला,  हाल मारी सजनी देव मनावों। ________________________________ रिद्धि सिद्धि रो दाता आवेला,  स्वामी सुंडालो घर आवेला,  हाल मारी सजनी देव मनावों। ________________________________   कंकु केसर री गार गलावु मोहे, मोतिया रा चौक पुरावोला, चार जुगो रा पंडत बुलावेन,  गणपत नोम धरावोला,  हाल मारी सजनी देव मनावो ________________________________ स्वामी सुंडालो घर आवेला,  रिद्धि रो दाता आवेला, हाल मारी सज्जनी देव मनावों। ________________________________ सीता ने कुंता रानी द्रोपदा, माई पारवता आवेला! चार- जुगो रा जोशी रे बुलावो,  गणपत पाठ विराजेला,  हाल मारी सजनी देव मनावों।  ________________________________ रिद्धि सिद्धि रो दाता आवेला,  स्वामी सुंडालो घर आवेला,  हाल मारी सजनी देव मनावों।  ________________________________ केसर ला...

जोगियो पुरे परे रा वासी

 दोहा : माला टोपी सिमरणा सतगुरु दी बख्शीस, पल पल गुरू ने बंधगी चरण निवावु शिष। जोग लिया तुम जीव नी जो- णियो! क्यों फिरे उदियासी, भुलोड़ा जीव प्रलागति जावे, मोनखो जन्म कदे आसी, जोगियों पुरे परे रा वासी। __________________________ थोने सन्त वतावे जकी हासी, जोगियो पुरे परे रा वासी। __________________________ वेद शास्त्र भागवत गीता, वताय वताय थक जासी, पढ पढ कई नर मरगा,  हरि हाथो कदे आसी,  जोगियों पुरे परे रा वासी। __________________________ थोने सन्त वतावे जकी हासी, जोगियो पुरे परे रा वासी। __________________________ हंस भी उठे तंत भी टूटे,  बोलणा बकणा थक जासी, ठ ठो नी ठहरे र रो नी रेवे, __________________________ थोने सन्त वतावे जकी हासी, जोगियो पुरे परे रा वासी। __________________________ रघु राम मेरा गुरू पुरा, दिया शब्द तपासी,  दास पीतो गुरू रे शरणे,  जोत में जोत मिल जासी, जोगियो पुरे परे रा वासी। ★★★★

भक्ति राजी होय ने कीजो

दोहा: सगरामा संसार में माला मोटी बात, धन्य नर जो फेरसी फेरे दिन ने रात,  फेरे दिन रात कमाई लागे हद भारी,  के सुरगा जावसी के मोनको तैयारी,  ऊंचे ठिकोणे जन्मसी गणा जोड़े हाथ,  सगरामा इ संसार में माला मोटी बात। ★★★ पेला दिल ओपणो होजो, पसे पोमड़ो दीजो! करो- सरदा सतगुरु जी रे आगे,  हिम्मत हार मती रीजे,  भक्ति राजी होय ने कीजो।  _______________________________ जो थारो मन क्यो नी मोने,  दोष गुरो ने मत दीजो,  भक्ति राजी होय ने कीजो।  _______________________________ झूठी निंदा कुबद कठारी,  ए पेला तज दीजे! सत- गुरु श्याम मुक्ति रा दाता,  वोरो शरणो लीजो वो,  भक्ति राजी होय ने कीजो। _______________________________ जो थारो मन क्यो नी मोने,  दोष गुरो ने मत दीजो,  भक्ति राजी होय ने कीजो।  _______________________________ जो तरवा थोरे इच्छा वे तो,  तुरंत तैयारी कर लीजो,  शिष उतार धरियो गुरू आगे,  तन मन अर्पण कीजो,  भक्ति राजी होय ने कीजो। _______________________________ जो थारो मन क्यो नी मोने,  ...