शहर में बंशी वाजे गैरी


टेरः- शहरीये में बाजे बीण मंदरी ,

अखण्ड धुन बंशी आ बाजे गेरी,


ज्ञान ध्यान का धोरा लागा लागी सुरत तणी। 

अलक पुरूष का हैं बिखमा मार्ग सैरी सांकड़ली ॥

शहरिये में बंशी बाजे गेरी ।



नाभी कमल में मडी बजारो हिरलो री हाट भरी। 

ज्ञानी होवे सोई पारख लेणा पारखो हीर कणी ॥

शहरिये में बंशी बाजे गेरी ।



गिगन मण्डल अखी अखाड़ा झिल मिल ज्योती जली। 

गेबी सरूपी वटे बाजा बाजे अणहद राग सुणी ॥

शहरिये में बंशी बाजे गेरी ।



अनेक  सन्तो रे शरणे आया धीरप ध्यान धरी। 

स्वामी डूंगरपुरी चरणो री सेवा संतो रो सथर थणी॥

शहरिये में बंशी बाजे गेरी ।

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