Posts

शहर में बंशी वाजे गैरी

टेरः- शहरीये में बाजे बीण मंदरी , अखण्ड धुन बंशी आ बाजे गेरी, ज्ञान ध्यान का धोरा लागा लागी सुरत तणी।  अलक पुरूष का हैं बिखमा मार्ग सैरी सांकड़ली ॥ शहरिये में बंशी बाजे गेरी । नाभी कमल में मडी बजारो हिरलो री हाट भरी।  ज्ञानी होवे सोई पारख लेणा पारखो हीर कणी ॥ शहरिये में बंशी बाजे गेरी । गिगन मण्डल अखी अखाड़ा झिल मिल ज्योती जली।  गेबी सरूपी वटे बाजा बाजे अणहद राग सुणी ॥ शहरिये में बंशी बाजे गेरी । अनेक  सन्तो रे शरणे आया धीरप ध्यान धरी।  स्वामी डूंगरपुरी चरणो री सेवा संतो रो सथर थणी॥ शहरिये में बंशी बाजे गेरी ।

रण संग्राम भाया बिन सुनो

दोहा : ससि बिना सुनी रैण ज्ञान बिन हिरदा सुना, बिन पुत परिवार पात  बिना  तरवर  सुना। महंत बिना मठ सुना  नृप बिन नगरी सुनी, दन्त बिन गज सुना हंस बिन तरवर सुना। घटा सुणी हैं बे-दामणी, वैताल कहे सुणो, नृप  विक्रम घर  सुना हैं,  बिन  कामणी। रण संग्राम (भाया) सुरा बिन सुनो,  आ धरती सुनी भीमा पांडू रे बिना।   भाव बिना भक्ति रस सुनो,  बिना भगत भगवान सुना।  रण संग्राम सुरा बिन सुनो.. धरती रो तेज सुरज बिना सुनो,  रैण सुनी चांद (शशि) रे बिना। रण संग्राम सुरा बिन सुनो.. सरवर पाल पाणी बिन सुनी,  तरवर सुनो एक पान रे बिना। रण संग्राम सुरा बिन सुनो.. अबला री गोद पुत्र बिना सुनी, बहन दुःखी एक भाई रे बिना।  रण संग्राम सुरा बिन सुनो.. सासु बिना रे सासरियो सुनों, थाल सुनो एक साला रे बिना।  रण संग्राम सुरा बिन सुनो.. दोय कर जोड़ युधिष्ठिर बोले, हिरदो सुनो हरि नाम के बिना। रण संग्राम सुरा बिन सुनो..

भजन यू करणा निर्भय होय नचीत

सगरामा इण संसार में माला मोटी बात,  धन्य जका नर फेरे, फेरे दिन और रात।  फेरे दिन और रात कमाई करे वे भारी,  या स्वर्ग में जावसी या फिर जन्म तैयारी। ऊंचे ठिकाणे जन्म सी घणा जोड़ेला हाथ, सगरामा संसार में माला मोटी वात ॥  भजन यूं करणा रे भायो निरभय होय नचीत ॥टेर॥ आसन पद्म में ध्यान लगावो तन मन इन्द्रियां जीत।  सिकल्प विकल्प मेट फुरणा  तुर्या सोही अतीत॥ भजन यूं करणा रे भाईड़ो निर्भय होय नचीत ॥टेर॥ रवि-शशी का देख सरौदा, सुखमण कर प्रतीत। अरद उरद बीच तार लगाने सूरत करो संगीत॥  भजन यूं करणा भाईड़ो निर्भय य होय नचीत ॥टेर॥ अगम भोम का ऐड़ा मोर्चा बांध लिया तन बीच। भजन तोब शिखर गढ़ छुटी भागी भ्रम री भीत॥  भजन यूं करणा रे भाईड़ो निर्भय होय नचीत ॥टेर॥ सोलन शिखर में पागी चढ़िया वहां नहीं होवे शीत।  शशि भाण सतगुरु की शोभा बिन नेणा प्र-तीत॥  भजन यूं करणा रे भायो निर्भय होय नचीत ॥टेर॥ बिन कर नटवो ढोल बजावे, बिन साज  संगीत।  बिना पावं के नटणी नाचे, बिन मुख गावे गीत॥  भजन यूं करणा भायो निर्भय होय नचीत ॥टेर॥ अदभुत खेल खिलाड़ी खेले, यह बेगम ...

भक्ति सुरा री

 भक्ति सुरा री, सुरा लड़े रण खेत में,  कायर भागा जाय! भक्ति सुरा री। कोनी कायर वालो काम भक्ति सुरा री॥ भक्ति कमाई ए सती श्रिया दे, चेलों भगत प्रहलाद भक्ति सुरा री, बलता मु बछिया तार! भक्ति सुरा री। कोनी कायर वालो काम भक्ति सुरा री॥ भक्ति कमाई ए सती अनुसूया, ऋषि अतरंग लार! भक्ति सुरा री, आंगण कुटी बणाय भक्ति सुरा री। कोनी कायर वालो काम भक्ति सुरा री॥ भक्ति कमाई ए पोचे पांडवे, ज्योरे घर दुर्वासा आय! भक्ति सुरा री, बलियो ओम उगाय भक्ति सुरा री, कोनी कायर वालो काम भक्ति सुरा री॥ भक्ति कमाई ए रानी द्रौपदा, पांचों पांडव घर नार! भक्ति सुरा री, सतड़ा री पाल बंधाय भक्ति सुरा री, कोनी कायर वालो काम भक्ति सुरा री॥ भक्ति कमाई ए मीरा मेड़तनी, ज्योरे लारे भोजोराज! भक्ति सुरा री, गुण गोविंद रा गाय भक्ति सुरा री, कोनी कायर वालो काम भक्ति सुरा री॥ भक्ति कमाई ए रानी रूपादे, ज्योरे सागे रावलमाल! भक्ति सुरा री, सैजे सुरगा जाय! भक्ति सुरा री, कोनी कायर वालो काम भक्ति सुरा री॥ भक्ति कमाई ए रानी तौलादे, ज्योरे सागे जैसल राज! भक्ति सुरा री, गुरु उगम जी लार! भक्ति सुरा री, कोनी कायर वालो काम भक्ति सुरा...