दोहा :
ससि बिना सुनी रैण ज्ञान बिन हिरदा सुना,
बिन पुत परिवार पात बिना तरवर सुना।
महंत बिना मठ सुना नृप बिन नगरी सुनी,
दन्त बिन गज सुना हंस बिन तरवर सुना।
घटा सुणी हैं बे-दामणी, वैताल कहे सुणो,
नृप विक्रम घर सुना हैं, बिन कामणी।
रण संग्राम (भाया) सुरा बिन सुनो,
आ धरती सुनी भीमा पांडू रे बिना।
भाव बिना भक्ति रस सुनो,
बिना भगत भगवान सुना।
रण संग्राम सुरा बिन सुनो..
धरती रो तेज सुरज बिना सुनो,
रैण सुनी चांद (शशि) रे बिना।
रण संग्राम सुरा बिन सुनो..
सरवर पाल पाणी बिन सुनी,
तरवर सुनो एक पान रे बिना।
रण संग्राम सुरा बिन सुनो..
अबला री गोद पुत्र बिना सुनी,
बहन दुःखी एक भाई रे बिना।
रण संग्राम सुरा बिन सुनो..
सासु बिना रे सासरियो सुनों,
थाल सुनो एक साला रे बिना।
रण संग्राम सुरा बिन सुनो..
दोय कर जोड़ युधिष्ठिर बोले,
हिरदो सुनो हरि नाम के बिना।
रण संग्राम सुरा बिन सुनो..
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